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Toggleपीरियड्स क्या है? (what is menstruation)
कारण, लक्षण और महिलाओं के लिए जरूरी बातें.
प्रस्तावना (Introduction)
“पीरियड्स” या मासिक धर्म, हर महीने महिलाओं के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है।
पीरियड्स कोई बीमारी नहीं है। यह एक reproductive system का हिस्सा है जो यह बताता है कि महिला गर्भधारण (pregnancy) के लिए तैयार है।
• पीरियड्स और मासिक धर्म को लेकर समाज में बहुत सारे मिथक (myths) हैं।
• इस लेख में हम ये जानेंगे कि पीरियड्स महिलाओं के जीवन का एक सामान्य और प्राकृतिक हिस्सा है।
• इस लेख में हम यह भी समझेंगे कि पीरियड्स क्या है (what is menstruation), कारण, लक्षण और महिलाओं के लिए जरूरी बातें, महिलाओं के लिए कौन-कौन सी बातें ध्यान रखना जरूरी होता है।
पीरियड्स क्या होते हैं (what is menstruation)
- पीरियड्स का मतलब होता है, हर महीने महिला के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया जिसमें गर्भाशय की परत (uterus की lining) टूटकर खून के रूप में बाहर निकलती है।
- जब अंडाणु का निषेचन नहीं होता (pregnancy नहीं होती), तब यह प्रक्रिया होती है।
- यह प्रक्रिया हर महीने एक चक्र (period cycle) के रूप में होती है।
- सामान्यतः महिलाओं में यह चक्र लगभग 28 दिनों का होता है, लेकिन कुछ महिलाओं में 28 दिनों से 35 दिन भी हो सकता है।
- हर महीने एक महिला के गर्भाशय (uterus) में अंदर एक नई एंडोमेट्रियम (endometrium) layer बनती है।
- अगर इसी में कोई अंडा (egg) आकर निषेचित (fertilised) हो जाए तो यह गर्भधारण हो जाता हैं !
पीरियड्स कब शुरू होते हैं (when do periods start)
पीरियड्स शुरू होने की आयु (age) 12 से 14 वर्ष है। लेकिन वर्तमान जीवनशैली के कारण पीरियड्स जल्दी आने लगे हैं। अब पीरियड्स 9 वर्ष की आयु से ही आने लगे हैं। पहली बार पीरियड्स आने के बाद 1-2 साल यह चक्र (cycle) नियमित होता है। कभी 20 महीने, तीन महीने या कभी कभी दो महीने बाद भी दुबारा पीरियड्स आते हैं। पहला पीरियड्स आने से पहले हमारे शरीर में कुछ बदलाव दिखाई देते हैं।
• हमारे स्तन (breast) का विकास होता है।
• कूल्हे (hips) चौड़े होने लगते हैं।
• सफेद स्राव (white discharge) दिखाई देता है।
• पीरियड्स आने से पहले हमारे पेट में दर्द होता है।
पीरियड्स के सामान्य लक्षण (common symptoms of periods)
- पेट दर्द (cramps)
- सिरदर्द, कमजोरी और थकान।
- मूड में बदलाव।
- कभी-कभी मतली (nausea) या उल्टी (vomiting)
- दस्त या ढीला पेट होना।
1 . पेट दर्द (cramps)
⇒ पीरियड्स का सबसे सामान्य लक्षण होता है, पेट दर्द हमारे पेट के निचले हिस्से में दर्द होता है। यह दर्द इसलिए होता है क्योंकि हमारे गर्भाशय (uterus) की मांसपेशियां (muscles) सिकुड़ती हैं, ताकि अंदर की परतें (layers) निकल सकें। इस हमारे पेट में दर्द होता है।कभी-कभी यह दर्द कम या ज्यादा हो सकता है।
2 . सिरदर्द, कमजोरी और थकान।
⇒ पीरियड्स के दौरान सिरदर्द, कमजोरी और थकान आम बात है। और कुछ महिलाओं में खून की कमी कारण चक्कर आना भी दिखाई देता है। इस समय महिला का शरीर कमजोर होता है।
3 . थकान और कमजोरी में बढ़ावा
→ पीरियड्स के दौरान शरीर को अधिक ऊर्जा (energy) खर्च होता है, और ज्यादा काम करने से शरीर थकान महसूस करता है। ज्यादा थकान महसूस करने की वजह से शरीर भी कमजोरी होती है।
4 . जी मिचलाना (nausea) / उल्टी (vomiting)
जी मिचलाना (nausea) या उल्टी (vomiting) जैसा महसूस होता है। यह शरीर के अंदर हो रहे हार्मोनल बदलाव के कारण होता है। पीरियड्स के दौरान (progesterone और estrogen) की मात्रा बदलती रहती है।
5 . दर्द या ऐंठन (पेट दर्द)
→ पीरियड्स के समय शरीर में (prostaglandin) केमिकल बनता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को संकुचित करता है। इससे दर्द या ऐंठन पेट में महसूस हो सकती है। यह दर्द कभी-कभी पीठ और जांघों में भी महसूस होता है।
(महिलाओं के लिए कुछ जरूरी बातें) (important tips for female)
• पैड या टैम्पोन हर 4–6 घंटे में बदलें।
• पीरियड्स के दौरान स्वच्छता बनाए रखें।
• पीरियड्स में खून ज्यादा आए तो डॉक्टर से मिलें।
• जंक फूड और ठंडा पेय (cold drink) से बचें।
• हल्का, आरामदायक कपड़े पहनें, भारी काम से दूर रहें।
• पीरियड्स के दौरान ज्यादा शारीरिक मेहनत से बचें।
• पीरियड्स में तनाव से बचें।
पीरियड्स से जुड़े सामान्य मिथक (periods related common myths)
- पीरियड्स को लेकर कई तरह के मिथक हैं जिनका कोई सत्य नहीं है। इन मिथकों का वैज्ञानिक से कोई संबंध नहीं है।
- कहते हैं कि पीरियड्स में मंदिर या रसोई में नहीं जाना चाहिए। पीरियड्स में अचार नहीं छूना चाहिए। अगर गलती से अचार को छू लिया तो अचार खराब हो जाता है, ऐसा माना जाता है।
- पीरियड्स में जो 5 से 7 दिन तक खून निकलता है, वो गंदा खून होता है।
• पीरियड्स का खून गंदा होता है।
→ कई महिलाओं का खून ज्यादा होता है। इसमें गर्भाशय (uterus) की परत के ऊतक (tissue) खून के साथ बाहर निकलते हैं। इसलिए ब्लीडिंग (bleeding) का होना सामान्य होता है।
•पीरियड्स में खून नहीं होना चाहिए।
→ ऐसा नहीं होता यह पूरी तरह से गलत है। पीरियड्स का आना और ब्लीडिंग होना का कोई संबंध नहीं है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है।
•पीरियड्स में गर्भधारण (pregnancy) नहीं हो सकती।
→ यह पूरी तरह से गलत है। क्योंकि पीरियड्स में गर्भधारण (pregnancy) हो सकती है। इसके चक्र पर निर्भर करता है। अगर cycle छोटी है 28 दिन से पहले तक और उसके बीच में भी गर्भधारण (pregnancy) हो सकती है।
•पीरियड्स के समय पूजा-पाठ या धार्मिक कार्य नहीं करने चाहिए।
→ ऐसा कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है कि पीरियड्स में पूजा-पाठ नहीं कर सकते। पुराने समय में लोग मानते थे कि इस समय एक ही जगह बैठने से पेट का दर्द बढ़ जाता है, इसलिए यह नियम बनाए गए।ऐसा किया जाता होगा पर इसका कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं है।